सरकार को मिली चेतावनी अगर ऐसे कर्ज माफ़ किया तो बैंक नहीं देंगे किसानों को लोन : RBI

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रिज़र्व बैंक के आंकड़े में पता चला है की वर्ष 2016-17 में कृषि कार्य के लिए आवंटित कर्ज की वृद्धि दर 12.4 फीसदी थी जो वर्ष 2017-18 में घाट कर 3.8 फीसदी रह गई थी.


मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सरकार बनने के साथ ही कांग्रेस ने किसानों का कर्ज माफ़ कर दिया। अब RBI ने इस कर्ज माफ़ी के साइड इफेक्ट्स गिनाते हुए सरकार को इशारों ही इशारों में चेतावनी दे डाली है. रिज़र्व बैंक के मुताबिक, किसानों की कर्ज कर्ज माफ़ी से बैंक भविष्य में किसानों को कर्ज देने  कंजूसी बरत सकते है, 

 

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कृषि क्षेत्र में एनपीए बढ़ा 

RBI के आंकड़े वर्ष 2016-17 में कृषि कार्य के लिए आवंटित कर्ज की वृद्धि दर 12.४ फीसदी थी जो वर्ष 2017-18 में घाट कर 3.8 फीसदी रह गई थी. चालू वित्त वर्ष के पहले छ: महीने में यह 5.8 फीसदी है, आरबीआई ने इसके लिए कृषि कर्ज माफ़ी को जिम्मेदार ठहराया है. वैसे माना जा रहा है की इसकी मुख्य वजह किसानों की कर्ज माफ़ी पर राजनीती बहस होती है,जिसकी शुरुआत के साथ ही किसान अपना कर्ज चुकाना बंद कर देते हैं. किसानों की तरफ से कर्ज नहीं मिलने की आशंका के बाद बैंक भी उन्हें कर्ज देने में हिचकने लगते है. ये भी पढ़े- रघुराम राजन बोले किसानों की सही नहीं, राजनितिक दाल न करें हल ही में RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी किसानों की कर्ज माफ़ी के साइड इफेक्ट गिनाये थे. उन्होंने कहा की था की ऐसे फैसलों से राज्य और केंद्र की अर्थव्यवस्ता पर नेगेटिव असर होता है. रघुराम राजन ने कहा की किसानों की कर्ज माफ़ी का सबसे बड़ा फायदा साठगांठ वालों को मिलता हैं.इसका फायदा गरीबो की जगह आमिर किसानों को मिलता हैं.उन्होंने आगे कहा की जब भी कर्ज माफ़ किए जाते है, तो देश के राजस्व को भी नुकसान होता है. 

रघुराम राजन ने तो किसानों की कर्ज माफ़ी के वादे पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग कर डाली थी.

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