बैंक बीमा पॉलिसी लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकते

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क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप बैंक में लोन या क्रेडिट कार्ड जैसी किसी सेवा के लिए आवेदन करें और इसके बदले बैंक अधिकारी आपसे कहें कि आपको बीमा पॉलिसी भी लेनी होगी.

बैंक ग्राहक के रूप में अपने अधिकारों के प्रति लोगों को जागरुक रहना चाहिए.
बैंक ग्राहक के रूप में अपने अधिकारों के प्रति लोगों को जागरुक रहना चाहिए।

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप बैंक में लोन या क्रेडिट कार्ड जैसी किसी सेवा के लिए आवेदन करें और इसके बदले बैंक अधिकारी आपसे कहें कि आपको बीमा पॉलिसी भी लेनी होगी. बैंक ग्राहकों को अपने अधिकारों के प्रति जागरुक करने वाली सरकारी संस्था बैंकिंग कोड एंड स्टैंडर्ड बोर्ड ऑफ इंडिया (बीसीएसबीआई) का कहना है कि बैंक बीमा पॉलिसी लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं. इसी तरह बैंक की किस योजना में पैसा निवेश करना है, ये भी पूरी तरह ग्राहकों की मर्जी पर होना चाहिए.

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बीसीएसबीआई ने ‘बैंकों के ग्राहकों के अधिकार’ नाम की किताब में कहा है कि बैंकों को गलत तरीके से बीमा पॉलिसी नहीं बेचनी चाहिए और इस बारे में ग्राहकों को सोच समझकर निवेश करने की जरूरत है. किताब में एक कहानी के माध्यम से ये बात समझाई गई है. इसमें एक बुजुर्ग व्यक्ति मास्टर साहब से कहता है कि वे बैंक में एडी कराना चाहते हैं, लेकिन बैंक के साहिब कह रहे हैं कि बीमा पॉलिसी ले लो, ज्यादा फायदा होगा. इस पर मास्टर साहब कहते हैं, ‘बैंक तुम्को पॉलिसी लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकता. बीमा पॉलिसी का पैसा कुछ समय के लिए नहीं निकाल सकते, इसलिए जरूरत पड़ने पर उसे उपयोग नहीं कर सकते. फिक्स्ड डिपॉजिट में रखा पैसा जरुरत पड़ने पर निकाला जा सकता है.’

बीसीएसबीआई का कहना है कि ‘बैंक में पैसा ऐसे डिपाजिट में ही रखें जिसे आप समझते हैं. बीमा पॉलिसी और म्युचुअल फंड में पैसा तभी लगाएं जब आपको उसकी समझ है, क्योंकि उनमें पैसा लगाने के जोखिम भी हैं. बैंक के स्टाफ आपको बीमा पॉलिसी लेने या म्यूचुअल फंड लेने में पैसा लगाने के लिए मजबूर नहीं कर सकते.’

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